गेंदामल हलवाई का चुदक्कड़ कुनबा-24

Gendamal Halwai Ka Chudakkad Kunba-24

कुसुम जब सीड़ियाँ नीचे उतर रही थी, तब लता उसे सीड़ियों पर मिली।
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनों के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई।

‘ध्यान से माँ.. छोरे का लण्ड बहुत तगड़ा है।’ कुसुम ने लता के पास से गुज़रते हुए कहा।

कुसुम की बात सुन कर लता सीड़ियों पर खड़ी हो गई।

‘तो मैं कौन सा पहला लण्ड चूत में लेने वाली हूँ।’

कुसुम ने पीछे मुड़ कर लता की तरफ देखा और एक बार फिर दोनों के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई, फिर कुसुम नीचे की ओर चली गई।
उधर कमरे में बैठा, राजू अपनी किस्मत को कोस रहा था कि आख़िर वो कुसुम के साथ यहाँ क्यों आया।

एक बार फिर से कमरे के बाहर से आ रही क़दमों की आहट सुन कर राजू के रोंगटे खड़े हो गए।
वो जानता था कि अन्दर कौन आने वाला है और वो बिस्तर से खड़ा हो गया।

जैसे ही लता उसके कमरा में आई तो उसने अपने सर को झुका लिया।

लता ने एक बार सर झुकाए खड़े राजू की तरफ देखा, फिर पलट कर दरवाजे को बंद कर दिया।

लता ने अपने ऊपर शाल ओढ़ रखी थी।

दरवाजा बंद होने की आवाज़ सुन कर राजू एकदम से चौंक गया..
उसे समझ में नहीं आया कि आख़िर लता ने दरवाजा किस लिए बंद किया है..

दरवाजा बंद करने के बाद लता ने अपनी शाल उतार कर टाँग दी और राजू की तरफ देखते हुए, बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गई।

अब लता सिर्फ़ नीले रंग के ब्लाउज और पेटीकोट में थी, उसकी कमर पर चाँदी का कमरबंद बँधा हुआ था।

लता का पेट हल्का सा बाहर निकला हुआ था और उसका रंग कुसुम के गेहुँआ रंग के उलट एकदम गोरा था..
उसका पेटीकोट नाभि से 3 इंच नीचे बँधा हुआ था और पेटीकोट के इजारबन्द के ऊपर वो कमर बन्द तो मानो जैसे कहर ढा रहा हो।

राजू ने तिरछी नज़रों से लता की तरफ देखा, जो उसकी तरफ देख कर मंद-मंद मुस्करा रही थी।

अपने सामने खड़ी लता का ये रूप देख उससे यकीन नहीं हो रहा था।

उससे देखते ही, राजू का मन मचल उठा.. पर कुछ करने या कहने के हिम्मत कहाँ बाकी थी..वो तो किसी मुजरिम की तरह उसके सामने खड़ा था।

‘ओए छोरे इधर आ..’ लता ने बिस्तर पर बैठते हुए कहा।

राजू ने एकदम से चौंकते हुए कहा- जी क्या..?

लता- जी.. जी.. क्या लगा रखा है, इधर आकर खड़ा हो…ठीक मेरे सामने।

राजू बिना कुछ बोले लता के सामने बिस्तर के पास जाकर खड़ा हो गया। अब भले ही वो सर झुका कर खड़ा था, पर नीले रंग के ब्लाउज में से लता की झाँकती
चूचियों का दीदार उसे साफ़ हो रहा था, क्योंकि लता उसके सामने बिस्तर पर बैठी हुई थी।

‘क्या कर रहा था..तू मेरे बेटी के साथ?’ लता ने कड़क आवाज़ में राजू से पूछा, जिसे सुनते ही राजू की गाण्ड फटने को आ गई.. पर वो बिना कुछ बोले खड़ा रहा।

‘सुना नहीं.. क्या पूछा मैंने?’

इस बार राजू के लिए चुप रहना नामुनकिन था।

‘वो मैं नहीं.. मालकिन कर रही थीं..’ राजू ने लता की तरफ देखते हुए कहा।

‘अच्छा तो तेरे मतलब सब ग़लती मेरी छोरी की है.. इधर आ..’

लता ने राजू का हाथ पकड़ कर उसे और पास खींच लिया..
राजू अवाक सा उसकी ओर देख रहा था..
इससे पहले कि उसे कुछ समझ आता, लता ने उसके मुरझाए हुए लण्ड को पजामे के ऊपर से पकड़ लिया और ज़ोर से मसल दिया।

‘आह दर्द हो रहा.. मालकिन ओह्ह..’
राजू ने लता का हाथ हटाने की कोशिश करते हुए कहा।

लता ने राजू की तरफ वासना से भरी नज़रों से देखते हुए कहा- क्यों रे, अब तो ये ऐसे मुरझा गया है…जैसे इसमें जान ही ना हो…पहले कैसे इतना कड़क खड़ा था.. साले.. मेरी जवान बेटी पर ग़लत नज़र रखता है।

ये कहते हुए लता ने उसके लण्ड को थोड़ा और ज़ोर से मसल दिया।

राजू की तो जैसे जान ही निकल गई, उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था कि वो कितने दर्द में है।

उसके चेहरे को देख कर लता को अंदाज़ा हुआ कि उसने कुछ ज्यादा ही ज़ोर से उसके लण्ड को मसल दिया।

लता ने उसके लण्ड को छोड़ दिया, फिर उसके लण्ड को हथेली से रगड़ने लगी..

राजू को जैसे लकवा मार गया हो। वो बुत की तरह लता को देख रहा था, जो उसकी तरफ देखते हुए, एक हाथ से अपनी चूची को ब्लाउज के ऊपर से मसल रही थी और दूसरे हाथ से राजू के लण्ड को सहला रही थी।

कुसुम- क्यों रे मेरे बेटी को खूब चोदता है.. एक बार मुझे भी चोद कर देख। साली उस छिनाल से ज्यादा मज़ा दूँगी।

ये कह कर उसने एक झटके से राजू के पजामे का नाड़ा खोल दिया।

इससे पहले कि घबराए हुए राजू को कुछ समझ आता.. उसका पजामा उसके घुटनों तक आ चुका था और उसका अधखड़ा लण्ड लता के हाथ की मुठ्ठी में था।

‘ये… ये आप क्या रही हैं मालकिन… ओह्ह नहीं मालकिन आ आहह..’

लता ने उसके लण्ड के सुपारे पर चमड़ी पीछे सरका दी और गुलाबी सुपारे जो कि किसी छोटे सेब जितना मोटा था, उसे देख लता कर आँखों में वासना छा गई..
उसकी चूत की फांकें फड़फने लगीं और चूत ने कामरस की बूंदे बहाना शुरू कर दिया।

क्योंकि अब राजू का लण्ड अपनी असली विकराल रूप में आना चालू हो गया था, लता ने अपने अंगूठे के नाख़ून से राजू के लण्ड के सुपारे के चारों तरफ कुरेदा..

तो राजू की मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और अगले ही पल उसे अपने लण्ड का सुपारा किसी गरम और गीली जगह में जाता हुआ महसूस हुआ।

उससे ऐसा लगा जैसे किसी नरम और रसीली अंग ने उसके लण्ड के सुपारे को चारों तरफ से कस लिया हो..

जब राजू ने अपनी मस्ती से भरी आँखों को खोल कर नीचे देखा।

तो जो हो रहा था, उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ।

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लता ने एक हाथ से उसके लण्ड को मुठ्ठी में पकड़ रखा था.. उसके लण्ड का सुपारा लता के होंठों के अन्दर था और दूसरे हाथ से लता अपनी चूची को मसल रही थी।

ये नज़ारा देख राजू एकदम से हैरान था, लता ने उसके लण्ड के सुपारे को चूसते हुए.. ऊपर राजू की तरफ देखा.. दोनों की नज़रें आपस में जा मिलीं।

जैसे कह रही हों, ‘मेरी बेटी को जैसे चोदता है.. आज मेरी चूत की प्यास भी बुझा दे।’

राजू का लण्ड अपनी पूरी औकात पर आ चुका था।

जिससे हाथ की मुठ्ठी में लता ने राजू के लण्ड को भर रखा था, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र के छोरे का लण्ड भी इतना बड़ा हो सकता है।

अचानक से लता ने राजू के फनफनाते हुए लण्ड को अपने मुँह से बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गई।

उसकी टाँगें बिस्तर के नीचे लटक रही थीं..उसने अपनी टाँगों को उठा कर घुटनों से मोड़ा और अपने पेटीकोट को टाँगों से ऊपर उठाते हुए, अपनी कमर तक चढ़ा लिया।

यह देख कर राजू की हालत और खराब हो गई।

लता की चूत की फाँकें फैली हुई थीं और उसमें से कामरस एक पतली सी धार के रूप में बह कर उसकी गाण्ड के छेद की तरफ जा रहा था।
उसकी चूत का छेद कभी सिकुड़ता और कभी फ़ैलता।

राजू बिना अपनी पलकों को झपकाए हुए, उसकी तरफ देख रहा था।

यह देख कर लता के होंठों पर कामुकता भरी मुस्कान फ़ैल गई।

‘देख.. तेरे लण्ड के लिए पानी छोड़ रही है।’ लता ने अपनी चूत की फांकों को फ़ैलाते हुए अपनी चूत के गुलाबी छेद को दिखाते हुए कहा।

यह सुन कर राजू की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। अब उससे समझ में आ रहा था कि कुसुम क्यों कह रही थी। उसके मायके के घर में कोई डर नहीं है और ये सच अब राजू के सामने आ चुका था।

राजू को यूँ खड़ा देख कर लता से रहा नहीं गया, उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर राजू के लण्ड को पकड़ा और उसके लण्ड के गुलाबी मोटे सुपारे को अपनी गीली चूत के छेद पर रगड़ने लगी।

राजू के लण्ड के गरम और मोटे सुपारे का स्पर्श अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही.. लता के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई।

लता की वासना से भरी हुई आँखें बंद हो गईं।

उसने बड़ी ही अदा के साथ एक बार अपने होंठों को अपने दाँतों से चबाया और काँपती हुई आवाज़ में राजू से भीख माँगने वाले लहजे से बोली- ओह्ह.. बेटा डाल दे.. मेरी चूत में भी अपना ये मोटा लण्ड पेल दे… चोद मुझे साले जैसी मेरी बेटी को चोदता है, ओह्ह..

राजू का लण्ड अब पूरी तरह से तन चुका था और अब राजू भी पूरे जोश में आ चुका था।

लता उसके लण्ड को अपनी दो उँगलियों और अंगूठे के मदद से पकड़े हुए, अपनी चूत के छेद पर उसका लण्ड का सुपारा टिकाए हुए थी।

राजू ने लता की टाँगों को घुटनों से पकड़ कर मोड़ कर ऊपर उठाया और अपनी पूरी ताक़त के साथ एक जोरदार झटका मारा।

राजू का लण्ड लता की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ तेज़ी के साथ अन्दर घुसता चला गया।

लता जो इतने सालों बाद चुद रही थी.. इस प्रचण्ड प्रहार के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी, वो एकदम से कराह उठी.. पर तब तक राजू का 8 इंच लंबा पूरा का पूरा लण्ड लता की चूत की गहराईयों में उतर चुका था।

लता- हइई.. माआअ मार..गई.. ओह हरामी.. धीरे नहीं पेल सकता था.. ओह्ह ओह्ह निकाल साले.. अपने लण्ड ओह मर गइईई.. फाड़ के रख दी.. मादरचोद.. मेरी चूत ओह्ह..

लता ने अपने कंधों और गर्दन को बिस्तर से उठा कर अपनी चूत की तरफ देखने की कोशिश करते हुए कहा।

राजू भी लता के कराहने की आवाज़ सुन कर थोड़ा डर गया और अपना लण्ड लता की चूत से बाहर निकालने लगा।

अभी उसने अपना लण्ड आधा ही बाहर निकाला था कि लता ने उससे कंधों से पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया।

जिससे राजू का लण्ड एक बार फिर लता की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अन्दर घुस कर उसके बच्चेदानी के मुँह से जा टकराया।

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एक लम्बी कथा जारी है।



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