मौसी ने मुझे पटा कर चूत चुदाई

(Mausi Ne Mujhe Pata Kar Chut Chudai)

uralstroygroup.ru के सभी पाठकों को दिल से मेरा नमस्कार. मेरा नाम राज है, मैं 24 साल का हूँ और मैं उत्तर प्रदेश से हूँ. uralstroygroup.ru का मैं नियमित पाठक रहा हूँ और इसकी सभी चुदाई की कहानी मेरी पसंदीदा सेक्स स्टोरी होती हैं और मैं सभी तरह की कहानियों को पढ़ने की कोशिश करता हूँ. uralstroygroup.ru पर कहानी पढ़ने के बाद ऐसा लगा कि मैं भी अपनी बात आप सभी पाठकों तक आसानी से पहुँचा सकता हूँ. तो चलिए मेरी ज़िंदगी की असली चुदाई की कहानी पर आते हैं.

ध्यान दीजिए ये एक थोड़ी सी लंबी इन्सेस्ट स्टोरी है, आराम से मजा लीजिएगा.
बात उस समय की है, जब मैं छोटा था. मेरी दादी का घर बहुत ही छोटे से देहात में है और मेरी नानी का घर शहर में है.

नानी का काफ़ी बड़ा परिवार है, इसमें उनकी दो देवरानियां हैं. मेरी नानी सब से बड़ी हैं. मेरी छोटी नानी की चार लड़कियां है जो कि मेरी मौसी लगती हैं. मेरी सग़ी मौसी की दो लड़कियां हैं, जो मेरी बहन लगती हैं.
मेरी छोटी नानी की दूसरे नंबर की लड़की का नाम निशा है, जिसकी उम्र 18 साल ही, वो देखने में वो काफ़ी मस्त लड़की है. वो हमेशा ही मुझे अलग ही नज़रों से देखती है. मैं उस समय करीब बहुत छोटा था, इसलिए मुझे कोई बात समझ में नहीं आती थीं, खास कर वो बातें, जो मैं जानता तक नहीं था.

एक रात की बात है. मैं और मेरी मौसी की लड़की घर में खेल रहे थे, तो मेरी मौसी की लड़की पूजा ने कहा कि चलो अब हम लोग आपस में पेली पेला करते हैं.
मुझे नहीं पता था कि ये क्या होता है. पूजा मुझ से केवल एक साल बड़ी है और उसकी बहन जूली एक साल छोटी है.
मैंने पूछा- ये क्या होता है?
तब उसने कहा- मैंने रात को मम्मी पापा को एक दूसरे के ऊपर सोते हुए देखा है. चलो हम भी वैसा ही करते हैं.
मैंने कहा- मैं तेरे ऊपर सो जाऊँगा, तो तेरी साँस फूलने लगेगी और तू मर जाएगी.
तब उसने कहा- ऐसा कुछ नहीं है, मेरी मम्मी मरी क्या? फ़ालतू बात करते हो.

मेरे काफी ना नुकुर करने के बाद भी वो नहीं मानी और मजबूर होकर मुझे उसके ऊपर लेटना पड़ा. वो ज़मीन पर लेट गई और मैं उसके ऊपर चढ़ गया.
वो मेरे बालों को सहलाने लगी और कहने लगी- राज कैसा लग रहा है.
तब मैंने कहा- ठीक ही लग रहा है.
फिर वो बोली- मजा आएगा बस यूँ ही पड़े रहो.

मैं उसके ऊपर चढ़ा रहा. कुछ देर तक वो कुछ नहीं बोली, फिर अचानक ही उसने मुझे अपने ऊपर से उतार दिया. मैं बैठ गया, उसने अपनी सलवार का इजारबंद खोलना चालू किया. मैं उसे देखने लगा, उसने टाइट सलवार पहनी थी, जिससे उसे अपनी सलवार नीचे करने में तकलीफ़ हो रही थी.

फिर मैंने उसे अपनी तरफ खिसकाया और उसकी सलवार पकड़ कर नीचे की तरफ खींच दिया तो उसकी सलवार नीचे आ गई. वो अन्दर ब्लैक कलर की पैंटी पहने हुए थी.
वो बोली- राज मेरी इस पैंटी को नीचे करो.
मैंने कहा- क्यों?
तो उसने कहा- करो ना.

मैंने उसकी पैंटी नीचे की, तो देखा कि उसकी चूत के ऊपर हल्के हल्के बाल हैं और उसकी चुत एकदम गुलाबी रंग की है. उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चूत के ऊपर रखा, उसकी चूत पसीने से गीली हो गई थी और गर्म थी.
तभी मुझे किसी के आने की आहट सुनाई दी, तो मैंने पूजा से कहा- कोई आ रहा है.

उसने जल्दी से अपनी पैंटी ऊपर कर ली और अपनी सलवार पहनने लगी. तभी निशा मौसी आ गईं और उन्होंने हम दोनों को देख लिया.
“क्या कर रहे हो राज बेटा?”
“कुछ नहीं मौसी.”
“कुछ तो कर रहे हो..” कह कर वो मुस्कुराने लगीं.
“क्या कर रही थीं पूजा, सच बोल, नहीं तो तेरी मम्मी को बताती हूँ.”
पूजा कुछ नहीं बोली और अपना सिर नीचे कर लिया.
तभी मेरी मम्मी आ गईं- क्या हो रहा है?

तब निशा मौसी ने सब कुछ सच सच बता दिया और मम्मी मुझे पकड़ कर छत पर ले गईं. फिर तो मेरी जम कर पिटाई हुई. मेरी कुछ समझ ही नहीं आया कि किस बात को लेकर मेरी पिटाई हुई.

इसके बाद मैं कुछ महीनों के बाद मैं मुंबई चला आया और यहाँ से करीब 3 साल बाद वापस गया. मुंबई से वापस आने के बाद अब मैं एक जवान मर्द बन चुका था और अब तक पूजा की बहन जूली उससे भी ज्यादा सेक्सी लगती थी. वो जूली, जो बचपन में सांवली थी, आज वो अपने आप में एक ख़ूबसूरत लड़की थी. मैंने जूली को कभी भी बुरी नजर से नहीं देखा था. जूली मुझसे एक साल छोटी थी और पतली दुबली सी लड़की थी.

मौसा जी कोई काम धाम नहीं करते थे. इसलिए मौसी आज भी मायके में ही रहती थीं.
ससुराल में मौसी के पास जगह थी तो सिर्फ रहने के लिए और खेत खलिहान कुछ भी नहीं था, जो घर था वो भी आधा गिरा पड़ा था. हम लोग मुंबई से आकर नानी के यहाँ पर ठहरे.. क्योंकि मेरा जो घर था वो मिट्टी का कच्चा घर था और इतने दिन मुंबई में रहने के बाद अब वो भी गिरा पड़ा था, जो रहने के लायक बिल्कुल नहीं था.

पूजा इस वक़्त घर पर नहीं थी और वो मेरी दूसरी नानी के यहां गई हुई थी. मैं तो बस पूजा को देखना चाहता था कि कब उसके दीदार हों. नानी से पूछने पर पता चला कि वो एक दो दिन में आ जाएगी.

खैर मैं मन मार के अपने दिन गुजारने लगा. इस वक़्त बहुत ज्यादा ठंडी थी और गांव की सर्दी तो आप सभी को पता है कि कितनी ज्यादा होती है, ख़ास कर उत्तर भारत की.
हम सभी लोग, निशा मौसी, उनकी माँ, मेरे चचेरा मामा और मैं सभी एक रज़ाई में बैठ कर मुंबई की बातें कर रहे थे और एक दूसरे को मुंबई की कहानी बता रहे थे.

निशा मौसी और मैं एक जगह बैठे हुए थे रजाई गरम थी, इसलिए बाहर निकलने का दिल नहीं कर रहा था. मैंने महसूस किया कि कोई मेरे पैर पर अपना पैर रगड़ रहा है. जब मैंने निशा मौसी की तरफ देखा तो वो मुस्कुराने लगीं और मैं भी मुस्कुरा दिया. उनकी कातिल मुस्कराहट जो वो अपने निचले होंठों को काट कर दिखा रही थी मुझे भी उनकी तरफ खींचने लगी.

मैंने अपना पैर उनके पैर पर रखा और अपना एक हाथ उनकी जांघों पर रखा और सहलाने लगा. अब वो मेरी तरफ देख और उत्तेजित हो रही थीं. मैंने अपना काम जारी रखा.

थोड़ी बाद मौसी ने अपना हाथ मेरे पैन्ट की तरफ किया और ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाने लगीं. मैंने भी उनकी तरफ हाथ बढ़ाया और उनकी रेशमी सलवार में कैद उनकी चूत को सहलाने की कोशिश में अपना हाथ उनकी जांघों पर से हटा कर थोड़ा आगे बढ़ाया तो वो थोड़ा सा खिसक गईं. अब मैं वो राज नहीं था जो आज से कुछ साल पहले था.

मुंबई में आकर मैंने एहसास किया कि आखिर पूजा मुझसे क्या चाहती थी और इस वक़्त मुझे पता था कि निशा मौसी क्या चाहती हैं.

अब मौसी की चूत मेरे हाथ के एकदम करीब थी. मैंने अपना हाथ उनकी चूत पर रखा और मैंने महसूस किया कि अपनी टाइट और रेशमी सलवार के अन्दर उन्होंने कुछ भी नहीं पहना था. सिर्फ उनकी सलवार ही थी, जो उनकी चूत से लिपटी हुई थी.

मैंने महसूस किया कि मौसी की झांटें काफी बड़ी हैं और वो मेरे हाथों में पकड़ी जा सकती थीं.
मैंने मौसी को धीरे से पूछा- ये क्या है… घास उगा रखी है?
उन्होंने अपनी उंगली होंठ पर लगा कर चुप रहने का इशारा किया. अब वो मेरे लंड को दबा रही थीं और मैं उनकी चूत को मसल रहा था.

सच कहूँ तो टाइट सलवार में उनकी चूत दबाने मजा ही अलग था क्योंकि उसमें हाथ जब फंसता था तो बड़ा मजा आता था. बीच बीच मौसी दोनों जांघों को शरारत में सिकोड़ देती थीं, जिससे मेरा हाथ उसमें कैद सा हो जाता था. मैं हाथ निकालने के लिए चूत पर चींटी काट लेता था और वो उछल सी पड़ती थीं. मौसी मेरे लंड को अन्दर ही अन्दर धीरे धीरे दबाये जा रही थीं और मैं भी चुदास के नशे में आता जा रहा था.

थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि मेरी पैंट गीली हो चुकी है, मुझे बहुत आनन्द आया. जब मैंने मौसी की तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रही थीं और ऐसा लग रहा था कि वो जीत गईं और मैं हार गया. मेरे बदन में एक हरारत सी होने लगी और ऐसा लगा जैसे मेरी पूरी जान निकल गई हो, लेकिन मैंने मौसी की चूत सहलाना नहीं छोड़ा.

कुछ देर बाद मेरा हाथ भी गीला हो गया, शायद मौसी झड़ चुकी थीं और उनका पानी मेरे हाथों में लग गया था. सच कहूँ तो मुंबई में रहने के बाद भी मैंने आज तक किसी लड़की की चूत को नहीं छुआ था लेकिन आज ऐसा लग रहा था कि सच में चूत ही ज़िन्दगी है.

तभी मौसी ने मेरी तरफ नशीली निगाहों से देखा और कहा- चलो कब तक सभी लोग बात करेंगे, अब खाना खा लेते हैं.
यह कह कर मौसी उठ गईं, मेरा हाथ हट गया. मैंने देखा कि मौसी खड़ी होकर अपनी ओढ़नी से अपनी गांड को ढक रही हैं और कुछ इठला और बल खाकर चल रही हैं.

मैंने मौसी को इस तरह से इठला कर देखा, तो मेरे होश उड़ गए. मैंने मौसी को कभी भी इतनी सेक्सी सलवार में नहीं देखा था, जो मुझ पर बिजली गिरा रही थी. ऊपर से उनके चूतड़ों के दो गोल उभार मेरी जान ले रहे थे.
मुझे पता था कि वो मेरे लिए ऐसा कर रही हैं क्योंकि वो थीं ही अपने आप में एक नशा, सच में मौसी एक अलग ही तरह की लड़की थीं.

अन्दर आँगन में जाकर उन्होंने सबको खाना खाने के लिया बुलाया. मैं भी उठा और आँगन में जाकर हाथ धोकर आग के पास बैठ गया.. जो ठण्ड से बचने के लिए जलाई गई थी. मैं मौसी के बगल में बैठ गया और खाना खाने लगा.
मौसी ने मेरे कान में कहा कि राज खूब खा लेना क्योंकि रात में बड़ी मेहनत करनी है.. इसी लिए तो अंडा बनाया है ताकि रात की ठंडी में गर्मी का मजा मिले और ठंडी कम लगे.
मैंने उनकी तरफ देखा और कहा- अच्छा किया जो मेरा मनपसंद खाना बनाया है इसी लिए तो आप मेरी सबसे अच्छी मौसी हो.
निशा मौसी ये सुनकर मुस्कुराने लगीं.
मैंने भी एक मुस्कुराहट भरी और लोगों की नज़रों से बचकर आँख मार दिया.. जिस से वो और खुश हो गईं.

मैं अब भले ही जवान हो चुका था, लेकिन निशा मौसी का इस तरह से मुझ पर लट्टू होना कुछ अच्छा नहीं लगता था क्योंकि मैं अब भी शर्म को अपनी आँखों में कैद कर के रखता था. उधर मौसी जो कि मुझसे कुछ और चाहती थीं, ये सोच कर कुछ अजीब सा लगता था. वैसे तो निशा मौसी मुझसे उम्र में बड़ी थीं, लेकिन इतनी भी नहीं कि ये बच्चा उनकी प्यास न बुझा सके. चूँकि छोटा होना बच्चे का अहसास तो करता है लेकिन वो तो केवल नाम का बच्चा होता है, मन में लहर होनी चाहिए.

खाना खाने के बाद ये तय होने लगा कि कौन कहा सोयेगा क्योंकि ठंडी में ये समस्या ज्यादा होती है और उससे बड़ी समस्या होती है बिस्तर की. हमारे पास जगह की कमी नहीं है, सोना चाहें तो छत पर या आँगन में सोया जा सकता है लेकिन ठण्ड में छत पर सोना जान देने के बराबर है.

बिस्तर कम होने की वजह से ये तय हुआ कि मैं और निशा मौसी एक ही कम्बल में सोयेंगे.
पहले तो लोगों को दिखाने के लिए मौसी ने कहा कि मैं और राज एक कम्बल में कभी नहीं सो सकते हैं.. क्योंकि राज के बदन से बदबू आती है.

तब नानी ने कहा- ठीक है बीच में जूली सो जाएगी.. फिर राज और फिर बाकी लोग. तब निशा मौसी ने अचकचा कर कहा- कोई बात नहीं.. मैं और राज एक जगह सो जायेंगे, मैं उसे बर्दाश्त कर लूंगी.. क्योंकि मेरा बेटा ही तो है, कोई बात नहीं.

जिनके मन साफ़ होते हैं, उनके लिए रिश्तों के अलग मायने होते हैं. सभी लोग जानते थे कि निशा और राज का क्या रिश्ता है.

सभी लोग लेट गए और नानी ने कहानी सुनानी शुरू की. ठंडी में पता ही नहीं चला कि कम्बल कब गर्म हो गया. वो भी दो लोगों साथ हों तो क्या कहना. नानी कहानी सुना रही थीं और मौसी मुझसे चिपक रही थीं.

कुछ देर के बाद सभी लोग सो गए लेकिन हम दोनों अभी भी जग रहे थे क्योंकि हमें कुछ और ही करना था.

मौसी ने अपने हाथ मेरे लंड पर रखा और मेरे और पास खिसक कर मेरे कान में पूछने लगीं- राज, क्या तुम्हें आज भी वो बात याद है, जो तुमने आज से कुछ साल पहले पूजा के साथ की थी?
मैंने पूछा- कौन सी बात?
तो वो कुछ नहीं बोलीं. क्योंकि मैं जानता था कि मौसी मेरे दिल में पूजा की चाहत का पता लगा रही हैं.
मैंने कहा- मौसी और थोड़ा सा पास आओ.
तो वो एकदम से मुझसे चिपक गईं और पूछने लगीं- क्या तुमने कभी किसी लड़की को किया है?
मैंने पूछा- क्या?
तो वो बोलीं- चुदाई…
मैंने कहा- मौसी यही बात मैं तुमसे भी पूछ सकता हूँ.
वो झेंप कर बोलीं- जाने दो फिर कभी.

अब वो लगातार मेरे लंड को पैन्ट के ऊपर से रगड़ रही थीं और मैं उनकी चूचियों को कपड़े के ऊपर से ही रगड़ रहा था. सच कहूँ तो ये आनन्द मुझे आज तक नहीं मिला था. निशा मौसी की चूची मोटी होने की वजह से 38 साइज़ की थीं.. यानि वो 38 नम्बर की ब्रा पहनती थीं. मैंने करवट लेकर अपनी टांग उनकी टांगों के ऊपर चढ़ा दिया और उनके चूतड़ों के छेद में ऊपर से ही अपनी उंगली घुसाये जा रहा था. जिससे बेकाबू हो कर वो मेरे लंड को रगड़े जा रही थीं. मैंने अपना होंठ उनके होंठ के बीच में दबा लिया और अपना दूसरा हाथ उनकी चूचियों पर रख दिया था.

वो अपने पैर को मेरे पैरों पर मसल रही थीं और मैं अपनी उंगली उनकी गांड में घुसा रहा था. मौसी की सलवार टाइट थी शायद इसी लिए मुझे काफी मजा आ रहा था. मुझे इतना तो पता था कि मौसी ने अन्दर पैंटी नहीं पहनी है.
मैंने उनके कान में कहा- मौसी, अब अपने चूतड़ों को मेरी तरफ कर लो.
तो वो बोलीं- क्यों?
मैंने कहा- ऐसे ही मजे के लिए.

यह कहानी आप uralstroygroup.ru में पढ़ रहें हैं।

मौसी मेरी बात मान गईं और उन्होंने अपने चूतड़ों को मेरी तरफ घुमा दिए.

अब मैंने अपना हाथ उनके पेट पर रख कर दबाया और उनके चूतड़ों की दरारों में अपना लंड ऊपर से ही घुसाने लगा. मैंने मौसी के कान में कहा- मजा आ रहा है?
तो वो बोलीं- हाँ आ रहा है.
फिर मैंने मौसी से कहा- अपनी सलवार उतारो.
तो वो बोलीं- अभी नहीं.
मैंने पूछा- क्यों?
तो वो बोलीं- जो मजा ऊपर से है, वो अन्दर से नहीं.
मैंने कहा- लेकिन मुझे चाहिए..
वो कहने लगीं- थोड़ा और तड़प लो तो और मजा आएगा. वैसे भी मैं और ये रात तुम्हारी ही तो है. आज तुम मेरे हो कर रहोगे.

मैंने मौसी का मुंह अपनी तरफ किया और अपनी गर्म साँसों से उनकी साँसें मिला कर, अपने होंठों से उनके होंठ मिला कर, अपने हाथ से उनकी चूत, तो कभी उनकी गांड और चूचियों को मसल रहा था. वो मेरे लंड को अपने हाथों से ऊपर से ही मसल रही थीं. मुझे ऐसा लगा कि स्वर्ग मिल गया हो और मैंने महसूस किया कि उनकी चूत गीली हो गई है.

तभी निशा मौसी बोलीं- राज अब बहुत हो गया.. बस सो जाओ.
मैंने कहा- क्यों सो जाओ.. मेरी बारी कहां गई?
वो कहने लगीं- मेरा हो गया, बाकी तुम जानो.
ये कह कर मौसी मुस्कुराने लगीं. मैं समझ गया कि अब निशा मुझसे कुछ और चाहती हैं.

मैंने कहा- चलो अब अपनी सलवार उतारो.
वो बोलीं- मुझे जरूरत नहीं है, तुम खुद उतार लो.
मैं बोला- ठीक है जानेमन, जैसा तुम कहो.

और मैंने उनकी सलवार नाड़ा खोल दिया और उनकी चिपकी हुई सलवार को नीचे की तरफ खिसकाने लगा. मुझे बस उनकी चूत देखने की तमन्ना थी कि असल में एक जवान लड़की की चूत कैसी दिखती है.
मैंने उनकी सलवार को उनके घुटनों तक खिसका दिया, जिससे मुझे उनकी चूत जो कि बिल्कुल झांटों से भरी हुई और ढकी हुई थी.. दिख गई.

मैंने पूछा- कब से छुपा कर रखा था.. आज ये मेरे सामने सरेआम हो गई.
तो उन्होंने कहा- तुम्हारे लिए ही तो बचा कर रखा था मेरे राजा..
यह कह कर वो मेरी पैन्ट का हुक खोलने लगीं. कुछ देर बाद मैं केवल अंडरवियर में रह गया था. उन्होंने उसे भी उतार दिया और मैंने बढ़कर उनके जम्पर को उनके तन से अलग कर दिया.

हम दोनों अब बिल्कुल खुल चुके थे और अपनी बातें कहने में शर्म नहीं आ रही थी.

अब वो सिर्फ ब्रा में थीं. उनकी चूचियां लाल कलर की जालीदार ब्रा में बिल्कुल ऐसे लग रही थीं जैसे बड़े बड़े सेब किसी जाली में बंद हों. मैंने अपने हाथ बढ़ा कर उनकी ब्रा में डाले और उनकी चूचियों को फिर से मसलने लगा. कुछ ही देर में वो फिर से एकदम गर्म हो गईं. हम दोनों जो भी हरकत कर रहे थे, बड़ी सावधानी से कर रहे थे ताकि कोई आवाज न हो.

तब मैंने कहा- निशा मौसी चलो आँगन में चलते हैं.
वो राजी हो गई और हम धीरे से उठे और आँगन में चले गए. फिर क्या था अब तो पूरी जगह मिल गई थी. मैंने आँगन में जाते ही उन्हें अपनी बाँहों में भर कर नीचे जमीन पर पटक दिया, जमीन ठंडी थी लेकिन अब हम दोनों पर ठंडी का भी कोई असर नहीं हो रहा था.

मैं नीचे फर्श पर उनके ऊपर चढ़ गया और उनकी चूचियों को ब्रा में से निकाल कर अपने मुंह में भर लिया. उनकी चूचियों के निप्पल कड़क होने लगे. मैं समझ गया कि ये रंडी अब गरम हो चुकी है.
मेरा लंड तो पहले से ही टाइट होकर खड़ा था और उनके हाथ मेरे लंड पर बराबर चल रहे थे. मेरे लंड से भी एक बार पानी निकल पड़ा और मैं वहीं पर शिथिल हो गया.

निशा मौसी मेरे से चिपकी रहीं और फिर से मेरे लंड को अपने हाथों की गर्माहट देने लगीं, जिससे लंड फिर से खड़ा हो गया. मैंने उन्हें नीचे सुला लिया.
फिर वो कहने लगीं- राज प्लीज मत कर.
मैंने कहा- तुम सही कहती हो मौसी.
मैंने अपना लंड उनकी चूत के पास ले जाकर कहा- निशा इसे भिगाओ.
तो उन्होंने कहा- कैसे?

मैंने अपना लंड उनके मुंह में धकेल दिया और वो उसे किसी इंग्लिश फिल्म की हीरोइन की तरह चूसने लगीं. फिर बोलीं- राज कोई आ जाएगा, जल्दी करो.. नहीं तो हम कुछ नहीं कर पाएंगे.. जल्दी से मुझे पेलो.. मेरे तन बदन में आग लगी हुई है.
मैंने कहा- ठीक है मेरी रंडी ले..

और मैं अपना लंड ले जाकर उन की चूत में घुसाने की कोशिश करने लगा लेकिन नाकाम रहा क्योंकि उनकी चूत काफी टाइट थी.
मैंने पूछा- बड़ी टाइट है.
तो वो बोलीं- आज तक किसी ने इसे मारी नहीं है, मारी क्या देखी भी नहीं है.
मैंने कहा- फिर भी तुम बहुत कुछ जानती हो.
तो वो कहने लगीं- वो सब फिल्मों से सीखा है.
मैंने कहा- अपना बदन बिल्कुल ढीला रखो.

उन्होंने वैसा ही किया और मैंने अपना लंड उनकी चूत में घुसा दिया. अभी लंड सिर्फ आधा ही गया होगा कि वो सिसकार कर रोने लगीं. मैंने उनके मुंह पर अपना हाथ रख दिया और फिर कोशिश करके पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया, जिससे उनकी चूत में से खून निकलने लगा. मैंने अपना लंड बाहर निकाल दिया.

वो मेरा हाथ हटाने में कामयाब रहीं और उठ कर खड़ी हो गईं और रुआंसी सी हो गईं.
मैंने कहा- कुछ नहीं निशा, तुम्हारी सील टूट गई है.
तब वो कहने लगीं- राज मुझे पता है लेकिन जलन और दर्द हो रहा है.. क्या मैं इसकी वजह से अब मजा नहीं ले पाऊँगी?
मैंने कहा- तुम सहयोग करो तो सही मेरी जान, तुम्हें पूरा मजा आएगा.

फिर वो पेट के बल लेट गई और बोलीं- राज, जब तक दर्द कम नहीं हो जाता तुम मेरी गांड मार लो प्लीज.
मैंने कहा- नहीं, पहले स्वर्ग का मजा लो.
वो मान गईं और डरते हुए कहा कि धीरे से डालना.
मैंने कहा- ठीक है.

मैंने अपना लंड उनकी कसी हुई चूत में धकेल दिया, अब वो एकदम बेसुध थीं. कुछ पल बाद उन्हें मजा आने लगा था. मैंने अपना हाथ उनकी चूची पर रखा और उनकी चूचियों को दबाने लगा, जिससे मौसी को और मजा आने लगा. अब मुझे भी मजा आ रहा था.
वो अपनी कमर को उठा उठा कर चुदा रही थीं और मैं भी फुल स्पीड में चोद रहा था. उनकी चूचियों को दबाये जा रहा था और अपने होंठ से उसके होंठ को चबाये जा रहा था. सच में इस समय ऐसा लग रहा था कि स्वर्ग की अप्सरा को चोद रहा हूँ, वो भी स्वर्ग में मौसी थीं ही ऐसी कि मैं उन्हें धकापेल चोद रहा था.

वो धीरे धीरे अपने मुंह से “आआह्ह ह्ह्ह ऊम्म्म आआऊऊच इम्म्म उह हुहह्ह..” की आवाजें निकाल रही थीं. कुछ ही देर में मौसी झड़ गईं और मुझे जोर से पकड़ लिया. मेरा लंड उनकी बच्चेदानी से टकरा कर वापस आ रहा था, जिससे वो अपने चूतड़ों को उठा देती थीं और उत्तेजित हो जाती थीं.

कुछ देर की चुदाई के बाद मैं भी अब झड़ने वाला था और वो भी मैंने पूछा- निशा कहाँ निकालूँ इसे?
तो वो उलटी हो गईं और बोलीं- इस माल को मेरी गांड पर निकालो.
मैंने अपना लंड जल्दी से उनके चूतड़ों की दरार में घुसा दिया और तभी मेरा माल बाहर आ गया.

मैंने उन्हें सीधा किया और पूछा- मजा आया?
तो वो कहने लगीं- राज, आज तुमने बता दिया कि तुम मेरे बेटे हो.. मेरे आशिक़ हो और मैं तुम्हारी रंडी और रखैल हूँ. तुम जब चाहो, जहां चाहो, मुझे चोद सकते हो. मेरे विवाह के बाद भी मुझे चोद सकते हो.
मैंने कहा- ठीक है.

इस तरह मैंने मौसी से सेक्स ज्ञान पाया. आज भी उनकी जवानी की वो रातें याद हैं. आज भी जब मैं मौसी के यहाँ जाता हूँ तो उन्हें चोदता जरूर हूँ क्योंकि अब वो और भी मजा देती हैं और उन्हें ये भी पता है कि राज एक बिजनेसमैन के साथ साथ कॉलबॉय भी है.

मेरी इन्सेस्ट स्टोरी आपको कैसी लगी बताइएगा और अपने विचार भी.. क्योंकि ये मेरी पहली और ट्रू स्टोरी है.



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