मेरी रानी की कहानी-3

(Meri Rani Ki Kahani- Part 3)

हम उसके पी जी पंहुचे। रूम में घुसते ही उसने मुझे जोर से हग किया। फिर एक दूसरे को ख़ूब सारी चुम्मियाँ की। थोड़ी देर बाद हम फ्रेश हुए। वो एक लॉज टाइप पी जी था। शहर के पॉश इलाके में बना हुआ था। कोई रोक टोक नहीं थी।

फिर हमने एक एक कप चाय ली और बाहर घूमने निकल गए। तब तक 4 बज चुके थे। मौसम खुशनुमा था। हम हाथ रिक्शा पर शहर में घूम रहे थे। रानी मुझ से चिपक कर बैठी हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे दो बिछुड़े हुए प्रेमी पता नहीं कितने साल बाद मिले हों।

रात को हम एक मॉल में फ़िल्म देखने गए। अक्षय कुमार की एक कॉमेडी मूवी लगी हुई थी।
शहर का मिजाज ऐसा था कि सब लोग नफासत से फ़िल्म देख रहे थे, कोई शोर नहीं। पूरे हाल में सिर्फ दो लोग हंस रहे थे और तालियां पीट रहे थे, वो थे मैं और रानी।

खैर फ़िल्म खत्म हुई, मैं और रानी हंसते कूदते हुए बाहर आये। सब लोग हमें देख कर ऐसे हैरान हो रहे थे जैसे कि हम किसी और ही ग्रह से आये हों।

मॉल से हमारा पी जी थोड़ा ही दूर था तो हमने पैदल चलने का सोचा। रास्ते में एक लिकर शॉप से हमने बियर के दो कैन ले लिए। रानी को आधे कैन में ही सुरूर होने लगा था, उसने अपना बाकी कैन मुझे दे दिया। मैंने वो भी खाली कर दिया। ऐसे ही हंसते खेलते हम पी जी पहुँच गए।

हमने दो कमरे लिए हुए थे। मैं रानी को उसके कमरे में छोड़ के वापस अपने कमरे में आने लगा तो रानी ने मुझे रोक लिया। वो बोली आप मेरे रूम में मेरे साथ ही सो जाओ। मुझे अकेले डर लगता है और आपके बिन मुझे नींद भी नहीं आएगी।
मैंने एक सेकंड के लिए सोचा कि यह सही नहीं रहेगा लेकिन फिर सोचा कि कुछ दिन और है हम साथ … जितनी खुशियां दे सकता हूँ, मैं रानी को जरूर दूंगा,
फिर मैंने उसे बोला- ठीक है, मैं चेंज करके आता हूँ।

दो मिनट बाद ही मैं उसके कमरे में आ गया। सिंगल रूम में बेड भी सिंगल ही था। लेकिन मौसम के मिजाज और हमारे हालात के हिसाब से वो बेड हमें काफी था। मैं रानी के कंबल में घुस गया। उसने अब तक चेंज नहीं किया था, मैंने उसे चेंज करने को बोला तो बोली- आप कर दो.
मैंने उसकी कही हर बात पूरी करने की ठान ली थी, मैंने पहले उसके माथे और होंठों को चूमा, फिर मैंने उसे हाथ पकड़ के छोटे बच्चे की तरह उठाया और उसे हाथ ऊपर करने को कहा। उसने भी झट से हाथ ऊपर कर लिए। मैंने उसकी स्वेट शर्ट उतार दी। उसके उतरते ही खुशबू का एक झोंका मेरी नाक से टकराया। मैंने उसे ऐसे ही हग कर लिया। मैं उसकी पीठ को मसल रहा था। उसने ब्रा पहनी हुई थी।

फिर मैंने उसकी जीन्स को भी उतार दिया। अब तक प्यार और बियर का नशा हम दोनों के सर चढ़ चुका था। मैंने फिर से उसे हग कर लिया। उसकी ब्रा का हुक मेरे हाथों में बार बार रुकावट डाल रहा था। मैंने रानी से पूछा- क्या मैं इसे निकाल दूं?
वो बोली- आपका जो मन करे, करो।

मैंने ब्रा का हुक खोल दिया। अब मेरे हाथ उसकी चिकनी सपाट कमर पर स्केटिंग कर रहे थे। खिड़की से बाहर की ठंडी हवा आती तो हम एक दूसरे को चिपक जाते। धीरे धीरे उसने भी मेरी नाईट शर्ट निकाल दी।
अब मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और खुद उस के ऊपर लेट गया। मैंने उसे ऊपर से नीचे तक चूमना चाटना शुरू कर दिया। माथे से लेकर पैर के अंगूठे तक एक भी हिस्सा ऐसा नहीं बचा जहाँ मेरे होंठ और जुबान न लगे हो।

वो सिहर रही थी, तड़प रही थी, सिसकारियां भर रही थी। मैंने उसे पलट दिया और खुद उस के ऊपर लेट गया, ऊपर से मैंने कंबल ले लिया। हम दोनों के बदन तप रहे थे, एक दूसरे को तपा रहे थे। अब तक मैं अपना पायजामा और बनियान भी निकाल चुका था। हम दोनों के बदन पर सिर्फ एक एक कपड़ा ही बाकी था।

मेरा पप्पू अकड़ चुका था और बाहर आने को बेताब था। रानी को पप्पू के झटकों का अपने कूल्हों पर अहसास हो रहा था। उसने हाथ डालकर पप्पू को पकड़ लिया और हौले से बोली- थोड़ी देर टिक के नहीं बैठ सकता क्या। क्यों बार बार डिस्टर्ब कर रहा है?

मुझे उसकी बात से हंसी आ गई, मैंने उसे गर्दन के पिछले हिस्से पर किस करना शुरू किया। उसकी कमर, कूल्हे, पिंडलियाँ सब जगह मैंने अपने प्यार की मोहर लगा दी थी। हम दोनों सब्र से बाहर हो चुके थे, बस एक दूसरे में समा जाना चाहते थे।
मैं अब पीठ के बल लेट गया और अपने पेट पर उसे पेट के बल लिटा लिया। हमारे होंठ फिर से एक दूसरे के साथ कुश्ती करने लगे।

इस खेल में हम दोनों नए थे और हमें कुछ नहीं आता था। जो हो रहा था, जैसे हो रहा था किये जा रहे थे बस।

अब पप्पू पिंकी को ठोकर मार रहा था। रानी उठ कर मेरी टांगों पर बैठ गई और बनावटी गुस्से के साथ पप्पू को अंडरवियर से बाहर निकाला और उसकी तरफ देखने लगी और बोली- अब मार झटके?
मुझे हंसी आ गई और मैंने कहा- छोटा बच्चा है ये, जैसे ही इसे अपने मतलब की चीज दिखेगी तो उछल कूद तो करेगा ही ये!
वो भोलेपन से बोली- मतलब की चीज से क्या मतलब?
मैंने कहा- आपकी जो पिंकी है ना वो प्रेमिका है इसकी। अब वो उसे दिखेगी तो उससे मिलने के लिए तड़प रहा है बेचारा.
वो बोली- अच्छा…!!! जे बात???
मैंने कहा- हाँजी, जेहि बात..

वो बोली- देख छोटू, मैं भी बहुत दिन से तड़प रही हूँ। पहले मैं अपनी प्यास बुझा लूं फिर तेरी प्यास भी बुझाऊंगी.. ओके?
मैंने पप्पू महाराज को दो झटके दिए और कहा- यह बोल रहा है, ठीक है.
वो मुस्कुरा कर पप्पू को फिर से अंडरवियर में डालने लगी तो मैंने कहा- नहीं, बाहर ही रहने दो। अंडरवियर पूरा ही निकाल दो।
उसने ऐसा ही किया।

फिर मैंने भी रानी की पैंटी निकाल दी और खुद बिस्तर पर लेट कर रानी को अपने ऊपर आने को कहा, उसे एक मिनट के लिए टांगें खोलने को कहा, फिर मैंने पप्पू को उसकी टांगों के बीच में पिंकी के ऊपर ऐसे सेट कर दिया जैसे वो पिंकी के सहारे खड़ा होकर सुस्ता रहा हो।
मैंने रानी से कहा- अब अपनी टांगों को टाइट कर ले।
मेरा पप्पू उसकी टांगों और पिंकी के घेरे में कैद हो गया था।

मैंने पप्पू को हल्के हल्के झटके देने शुरू किये तो रानी तड़पते हुए बोली- बहुत अच्छा लग रहा है। गुदगुदी सी हो रही है। ऐसे ही करते रहो।
हम फिर से एक दूसरे के होंठों में खो गए थे, ऐसा लगता था जैसे होंठ नहीं शराब पी रहे हों। नशा ऐसा कि बढ़ता ही जा रहा था। हम जैसे आकाश में उड़ रहे हो।

रानी मुझ में सिमटी जा रही थी। मेरा एक हाथ उसके बूब्स पर चल रहा था। यकायक उसकी सिसकारियां तेज हो गई, मैं जैसे जैसे उसके बूब्स को मसलता था, उसकी तड़प तेज होती जाती थी।

ऐसे करते करते हमने पलटी मारी, अब वो नीचे थी और मैं ऊपर। पप्पू को फिर से उसी जगह सेट किया।
रानी सिसकार उठी, बोली- ओह माय गॉड! आपने ये सब पहले क्यों नहीं किया मेरे साथ?
मैंने कहा- डर लगता था, कहीं तुम्हें खो न दूं.
वो बोली- आज सारे डर मन से निकाल दो। ऐसा सुकून और मजा मुझे कभी नहीं मिला। मुझे चूर चूर कर दो आज। मसल कर रख दो।

मेरी रानी सिसकारियां लेती हुई बोलती जा रही थी, उसकी सिसकारियां मेरा नशा और जोश दोनों बढ़ा रही थी। मैं उसके बूब्स को जोर जोर से चूसने लगा। एक को चूसता तो दूसरे को मसलता, दूसरे को चूसता तो पहले को मसलता। उसका एक हाथ मेरे बालों को कस के पकड़े हुए था, दूसरे हाथ से वो मेरी पीठ मसल रही थी।

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मैं हौले हौले से पप्पू को पिंकी पर रगड़ने लगा था। रानी तो जैसे काबू से बाहर हो रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई आत्मा उस के अंदर घुस आई हो और उसे तड़पा रही हो।

कुछेक मिनट बाद जोर के झटके के साथ शांत ही गई। जैसे कोई गाड़ी गियर फंसने के बाद बन्द होती है। एक बार के लिए तो मैं डर ही गया था। लेकिन जैसे ही उसकी साँसों को महसूस किया तो जान में जान आई।
मैं भी बस चरम पर ही था, कुछ पल बाद मेरा भी पानी निकल गया। मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था। हम एक दूसरे की साँसों को खामोशी से महसूस कर रहे थे। फिर हम ऐसे ही बिन कपड़े एक दूसरे की बांहों में सो गए।
वैसे वक़्त सब के उठने का हो रहा था लेकिन रविवार था तो बाकी सब भी लेट ही उठे।

हमारी भी नींद 11 बजे खुली। नींद खुलते ही मैंने रानी को किस किया, वो भी उठ गई, उसने भी मुझे गुड मोर्निंग किस किया। हमारा बिस्तर से नीचे उतरने का मन नहीं था। कुछ देर यूँ ही पड़े रहे.
रानी ने मेरे सोए हुए पप्पू को पकड़ लिया, उसकी ओर देखते हुए मासूमियत से बोली- ओए छोटू..!! कैसा लगा पिंकी से बातें करके?
मैं मुस्कुरा दिया, मैंने कहा- अभी बातें शुरू कहाँ हुई है। अभी तो बस इशारे हुए है। बातें तो करेंगे गर तुम करने दोगी तो?
रानी बोली- मैंने कब मना किया?
मैंने कहा- तुमने अभी तक पप्पू को किस भी नहीं किया है.

रानी ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया और मुस्कुरा कर खड़ी हो गई।
वो बोली- चलो, जल्दी से फ्रेश हो के तैयार हो जाओ फिर घूमने चलते हैं।

हम नहा धो कर तैयार हो गए। तय ये हुआ कि खाना बाहर खाएंगे। हमने एक टैक्सी बुक की और एक दो जगह देखी। एक मंदिर भी देखा। लेकिन दोनों के ही मन में कुछ और ही इच्छाएं मचल रही थी और दोनों को ही एक दूसरे के जज्बातों का अहसास था। घर से इतनी दूर आये है और कुछ देखा भी नहीं, ये सवाल बाद में परेशान ना करे इसलिए जल्दी जल्दी कुछ हिस्टोरीकल बिल्डिंग्स देखी। 4-5 घंटे घूमने के बाद हम वापस जल्दी ही 6 बजे तक वापस पी जी आ चुके थे।

पी जी सुनसान पड़ा था, सब लोग वीकेंड मनाने बाहर निकले हुए थे। सिर्फ पी जी का स्टाफ था।
हमने स्टाफ से दो कप चाय के लिए कहा और अपने रूम में आ गए।

मैं चेयर पर बैठ गया और रानी बेड पर लेट गई। उसकी साँसों से उसकी छाती ऊपर नीचे हो रही थी। उसके उरोज तने हुए थे, मैं उन्हें देख रहा था।
रानी बोली- क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- देख रहा हूँ कि ये कैसे मुझे उकसा रहे हैं.
रानी बोली- हप्प … कोई चैलेन्ज नहीं कर रहा आपको। अपने अरमान काबू में रखो.

मैं उसके पास जाकर लेट गया और बोला- इतनी हॉट और सेक्सी लड़की एक कमरे में साथ हो तो कोई अरमान कैसे काबू रखेगा? मैं कोई ऋषि तो हूँ नहीं। हाँ अगर तुम मुझे अपने कमरे में जाने दो तो थोड़ा कंट्रोल किया जा सकता है।

रानी शर्मा कर मेरे से लिपट गई। उसने अपना चेहरा मेरी बाहों में छुपा लिया और बोली- मुझे विश्वास है कि आप मेरी खुशी के लिए कुछ भी करोगे और मेरी मर्जी के बिना मेरे साथ कुछ भी नहीं करोगे। इसी वजह से आपके लिए मेरे मन में प्यार बढ़ता चला जाता है। आपके साथ सब कुछ करने का मन करता है लेकिन डर लगता है बहुत!
मैंने कहा- कैसा डर?
वो बोली- कभी किसी भी वजह से हम अलग हो गए या आप मेरी किसी गलती की वजह से गुस्सा होकर मेरे से दूर चले गए तो मैं जी नहीं पाऊंगी.
मैंने कहा- देख, गुस्सा तो मैं तेरे से चाह कर भी नहीं हो सकता। ऐसा तो नहीं है कि मुझे तुमपे गुस्सा आता ही नहीं। बहुत गुस्सा आता है। लेकिन जैसे ही तुम्हें देखता हूँ गुस्सा एक सेकंड में उड़ जाता है। तुम्हारी प्यारी प्यारी आंखों में आंसू नहीं देख सकता मैं … और रही बात दूर जाने की तो मैं इतना कह सकता हूँ कि जान निकल जाती है इस बात के सिर्फ ख्याल से। कभी ऐसा हुआ तो पता नहीं क्या ही होगा?

रानी ने उठ कर मेरे गाल पे एक किस्सी की और बोली- आई लव यू सो मच!
हम कुछ मिनट ऐसे ही लेटे रहे और फिर चाय आ गई। हमने खिड़की के पास बैठ कर चाय पी। दूर क्षितिज में सूरज छिपने जा रहा था और हम एक दूसरे की आंखों में अपना आशियाना बना रहे थे।

चाय पीने के बाद मैं चेंज करने अपने कमरे में आ गया।

कहानी जारी रहेगी.



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