टीचर जी का लंड

(Teacher Ji Ka Lund)

नमस्कार पाठको, मेरा नाम साहिल है और मैं 21 साल का हूँ. मैं uralstroygroup.ru का एक नियमित पाठक हूँ. मुझे uralstroygroup.ru पर प्रकाशित गे कहानियां बहुत पसंद हैं. आज मैं आपके साथ एक गांड मराने के कहानी शेयर करूँगा.

मुझे लड़कों में भी रुचि है, ये मुझे दसवीं क्लास में ही पता चल गया था. मुझे लड़कों के लंड देखने में बहुत रुचि थी, लेकिन कभी लंड देखने का चांस नहीं मिला था.

यह कहानी तब की है, जब मैं 19 साल का था. मैं दिखने में एकदम फेयर हूँ, मेरी हाइट 5 फुट 8 इंच है. मैं स्लिम और क्यूट सा चेहरे वाला माशूक लौंडा हूँ. मेरी छाती थोड़ी फूली हुई सी है, लड़कियों के जैसे मेरे नर्म नर्म से थे.

उस वक्त तब मैं गणित में कमजोर होने के कारण ट्यूशन जाता था. मैं और मेरा एक दोस्त अमित साथ ही पढ़ने जाते थे.

हमारे गणित के अध्यापक 30 साल के होंगे, उनमें मुझे बहुत रुचि थी. उनकी लम्बाई 5 फुट 10 इंच होगी. उनका सांवला रंग था. बड़ी तगड़ी और चौड़ी छाती थी, चौड़ी जांघें और मजबूत बाजू थे. वे पूरे पहलवान थे.

एक दिन ट्यूशन में अमित ने मजाक में मेरी मुलायम छाती को मसल दिया. उसने मेरे मम्मे दबाते हुए बोला- तेरा सीना तो लड़कियों जैसा नर्म है.

तभी टीचर जी आ गए, उन्होंने यह नजारा देख लिया. मगर वे कुछ बोले नहीं, बस पढ़ाने लगे. उसके बाद वो टास्क देकर दूसरे रूम में चले गए. तभी अमित फिर से मेरे मम्मों को जोर जोर से मसलने लगा. मुझे भी अपने दूध दबवाने में मज़ा आ रहा था.
सर जी तभी कमरे में आ गए. हम चुपचाप बैठ गए. सर ने फिर से ये सब देख लिया था या नहीं.. पता नहीं चला.

कुछ दिन बाद अमित उसके मामा के यहां चला गया, तो मैं अकेला ही सर के घर क्लास पढ़ने जाता था.

एक दिन जब मैं पहुंचा, सर ने डोर खोला. मैं सर को देखता ही रह गया. सर उस दिन एक टॉवल में थे और उनका पूरा बदन.. आह.. क्या मस्त लग रहा था. उनकी छाती पर बहुत सारे बाल और उनका मर्दाना चेहरा गजब लग रहा था. छाती से बाल की एक लम्बी धार पेट से होते हुए टॉवल के अन्दर तक नागिन सी चली जा रही थी.

सर पढ़ाने के लिए सोफे पे बैठ गए थे. मैं हमेशा की नीचे बैठा था. सर ने मैथ के कुछ सवाल सॉल्व करने के लिए दिए. लेकिन मेरा मन तो उनकी जबरदस्त बॉडी में रम गया था. मैं बीच बीच में सर के लंड के एरिया को भी थोड़ा देखे जा रहा था. शायद सर ने मुझे देख लिया था.

सर अपना लंड सहलाते हुए बोले- आज बहुत गर्मी है न!
मैंने हाँ बोला.
गर्मी तो मेरे अन्दर भी लगी हुई थी.
सर बोले- ठीक है तुम काम करो, जब तक मैं बाथरूम से आता हूँ.

यह कह कर टीचर जब उठे, तो उनका तौलिया गिर पड़ा या उन्होंने जानबूझ कर गिरा दी. मैं तो देखता ही रह गया, वो लाल अंडरवियर में गजब सेक्सी लग रहे थे. उनके लंड का उभार देख कर, उनका लंड मुँह में लेने को मन हो रहा था.
सर ने फिर से तौलिया लपेटा और चले गए. अब मेरा मन मैथ में नहीं था, मेरा तो मन सर के लंड को देखने में था.

कुछ देर बाद सर आये और बोले- काम हो गया.. दिखाओ? अगर एक भी गलती हुई तो मार पड़ेगी.

सर मेरे किये हुए सवाल देखने लगे और पहली गलती पे ही सर ने मेरी गांड पर हाथ से जोर से मारा. उनकी मार से उनकी बड़ी बड़ी उंगली.. और सख्त हाथ मुझे टच हो रहा था.
सर बोले- लगता है इस मोटी जीन्स की वजह से दर्द नहीं हो रहा है.
ऐसा बोल कर उन्होंने मेरी जीन्स को थोड़ा खिसका दिया. मैं ब्लैक कलर की चड्डी में था. मेरी गोरी गांड काले रंग की चड्डी में गजब ढा रही थी.

सर ने मुझे चड्डी में कर दिया, मैंने कुछ नहीं बोला. फिर जब दूसरी गलती पे सर ने मारा तो सर का हाथ मेरी मुलायम गांड पर रुक गया. वो नोटबुक देखते देखते, कभी कभी मेरी गांड को दबा देते थे.

तभी डोर बेल बजी, सर ने दरवाजा खोला. शायद उनका कोई दोस्त आया था. आगंतुक अन्दर आये, तो सर ने बोला- आओ सुशील बैठो?
उन्होंने पूछा- ये कौन है?
तो सर ने बोला- ये मेरा स्टूडेंट है.

सर और उनके दोस्त बातचीत करने लगे. मैं सुशील जी की ओर चेहरा करके सर के पास खड़ा था.

सर आकर जैसे ही बैठे, सर को मेरे गोरी गांड को दिखाने के लिए मैंने चड्डी को थोड़ा खिसका दिया. सर मेरी गांड को देख रहे थे.

लेकिन तभी सुशील जी ने बोला- उसे खड़ा क्यों किया है.. बैठ जाओ?
सर ने भी मुझसे बैठने को कहा.
मैं टी-शर्ट को डालकर गांड को छुपाते बैठ गया. जब मैं मुड़ा तो शायद सुशील जी ने मेरी खुली गांड को देख लिया.

तभी उन्होंने सर से बोला- यार मुझे वो किताब चाहिए.. जो मैंने तुमसे कहा था.
सर बोले- रुक.. लाता हूँ.
तभी सुशील जी बोले- तू रुक, तेरा स्टूडेंट ला देगा.
सर बोले- ओके.. साहिल वो बेडरूम के रैक में से रेड वाली बुक ले आना.

मैं मना नहीं कर सकता, लेकिन मैं जानता था कि मैं उठा तो सुशील जी मेरी गांड को खुली हुई देख लेंगे.

मुझे थोड़ा डर लगा, लेकिन उठ कर किताब लेने के लिए गया. मैं बेडरूम में ठीक ठाक होकर बुक ढूंढने लगा.

जब मुझे बुक नहीं मिली, तो मैंने आवाज़ लगाई- सर नहीं मिल रही.
तभी सुशील जी आये और बोले- मैं हेल्प कर देता हूँ.

वो आके मेरे पीछे खड़े होकर बुक ढूंढने लगे. वो देखते देखते मेरे पीठ से सट के खड़े हो गए, उनका पूरा शरीर मुझसे टच हो रहा था. मैं फिर से गर्म होने लगा.

उनकी हाइट 6 फिट होगी. वे गोरे और सुडौल बॉडी वाले थे. उनकी छाती के बाल मुझसे रगड़ खा रहे थे. उनका लंड पैन्ट के ऊपर से मेरी गांड में रगड़ रहा था.

तभी उन्होंने मेरे कान में बोला- सर को सिर्फ गांड दिखा रहे थे या और कुछ भी दिखाते हो?
मैंने गांड को उनके लंड की ओर उछालते हुए बोला- आपको भी देखना है क्या?

तभी वे मेरी चुचियां को दबाने लगे और एक हाथ गांड में डालने लगे. वे बोले- कितनी नर्म गांड है तेरी..

मैंने उनके लंड को पैन्ट के ऊपर से सहलाया. उनका लौड़ा आधा उठा हुआ था. उन्होंने मुझे नीचे बैठा कर अपना बेल्ट खोला. मैंने उनके पैन्ट को खोल कर चड्डी को खिसका कर उनके लंड को हाथ में ले लिया. उनका लंड लगभग 7 इंच का होगा. झांट के बाल भरे हुए थे, उनके लटकते आंड मुझे पागल कर रहे थे.

मैंने उनके लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगा. फिर उनके बॉल्स से खेलने लगा.
उन्होंने लंड चुसाते हुए बोला- जल्दी कर..
मैं जल्दी जल्दी चूसने लगा. पांच मिनट में उनका माल गिरने लगा. सुशील जी ने मेरे मुँह में सब गर्म माल डाल दिया.
मैंने लंड चूसा और रस को वहीं निकाल दिया.

यह कहानी आप uralstroygroup.ru में पढ़ रहें हैं।

तभी सर ने आवाज लगाई- अरे भाई कितनी देर लग रही है?
तो सुशील जी बोले- बस आ ही रहे हैं.
ऐसा बोलकर वे ठीक होकर चले गए.

फिर मैं भी ठीक होकर बाहर आ गया. तभी सर ने बोला- साहिल, आज तुम्हारी छुट्टी.. तुम जा सकते हो.
उस दिन सर के लंड का स्वाद तो नहीं मिला, लेकिन उनके दोस्त के लंड का स्वाद मिल गया था.

उस दिन तो सुशील जी के लंड का स्वाद मिला, फिर जब मैं अगले दिन ट्यूशन गया तो तब सर ने दरवाजा खोल कर बैठने को बोला.

फिर कुछ समय बाद बोला कि कल उस रूम में क्या छोड़ कर गए थे?
मैंने बोला- कुछ नहीं तो सर.
सर बोले- सुशील का वीर्य अच्छा नहीं लगा क्या?
मैंने बोला- ये आप क्या बोल रहे हैं?
तो सर ने बोला- मुझे तेरा झूठा नाटक नहीं सुनना है.

फिर वो सोफे से उठ कर खड़े हो गए. मैं नीचे बैठा था, उन्होंने अपना पैंट खोल दिया. अन्दर सिर्फ रेड कलर की हाफ चड्डी पहने हुए सर खड़े थे.
वे अपने लंड पर अपना हाथ फेरते हुए बोले- चल शुरू हो जा.
मैंने कुछ न जानते हुए बनने का नाटक किया- क्या सर?
सर ने बोला- ज्यादा नाटक मत कर भोसड़ी के!

यह बोल कर सर ने मेरे सर को अपने हाथों से पकड़ा और अपने अंडरवियर में दबाते हुए लंड पर घिसने लगे थे.

मैं उनकी अंडरवियर की खुशबू से पागल हुआ जा रहा था. फिर मैंने उनके लंड को चड्डी के ऊपर से ही चूस कर गीला कर दिया. उसके बाद उनका अंडरवियर हटा दिया. उनका 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा काला लंड, लटकते आंड बड़े बड़े सुडौल जांघों के बीच में लटक रहे थे. मैंने उनके लंड को पहले जीभ से चाटा, फिर मुँह में भर लिया. उनका लंड मोटा था इसलिए मेरे मुँह में ठीक से घुस नहीं रहा था. लेकिन सर मादक सिसकारियां भर भर के मेरे सिर को पकड़ के अपने लंड की ओर धकेल रहे थे.

कुछ ही देर में मजा आने लगा. अब मैं भी पूरी तन्मयता से लंड चूसे जा रहा था.

फिर सर ने मुझे पूरा नंगा किया और खुद भी हो गए. इसके बाद उन्होंने मेरी चुचियां दबाईं और दो उंगलियों के बीचे में पकड़ कर मेरे टिकोरे मसलने लगे. सर पहले तो धीरे धीरे मींज रहे थे, फिर जोर जोर से मसलने लगे. मुझे अपने मम्मे मिंजवाने में बहुत मजा आ रहा था.

फिर उन्होंने मेरे एक टिकोरे को मुँह में लिया और उसे चूसने लगे. साथ ही दूसरे को हाथ में भर कर मसल रहे थे. मैं गनगना गया और फिर से उनके लंड को चूसने लगा.

उसके बाद उन्होंने मुझे सोफे पर उल्टा किया और आयल लेकर मेरे गांड के होल में उंगली से आगे पीछे करने लगे. मैंने भी गांड के छेद को फैला दिया. पांच मिनट ऐसा करने के बाद उन्होंने अपने 7 इंच के लंड पर तेल लगाया. फिर हाथ से लंड सहलाते हुए, उसे मेरी गांड पर रगड़ने लगे.

लंड का सुपारा छेद पर रगड़ने के बाद सर ने मेरे छिद्र पर अपना सुपारा टिका दिया. उनका गरम दहकता सुपारा मेरी गांड के सुराख को बड़ी राहत सी दे रहा था.

तभी सर ने मुझे दबोच कर पकड़ा और जोर से लंड पेल दिया. तेल की वजह से गांड का छेद चिकना था, सो सट से घुस गया. मुझे ज्यादा दर्द तो नहीं हुआ, लेकिन तब भी दर्द तो हुआ. मोटा लंड था.. गांड चिर गई थी.

मैं आह करके चिल्ला दिया तो उन्होंने मेरे मुँह पे हाथ रख के गांड में लंड पूरा पेल कर झटका देते हुए मेरी गांड मारने लगे. सर अपने मजबूत पहलवानी शरीर से जोर जोर के धक्के मार रहे थे. मुझे भी दर्द होना कम हो गया था. मैं टांगें फैलाए गांड मरा रहा था.

फिर उन्होंने मुझे अपने कंधे पर लटका लिया. मेरी गांड पर अपना लंड टिकाए हुए थे. सर इसी अवस्था में मेरी गांड उछालने लगे. लंड सटासट अन्दर बाहर होने लगा. मुझे हल्के दर्द के साथ गांड मराने में बड़ी लज्जत मिल रही थी.

फिर सर ने मुझे सोफे पर पटक कर मेरे पैरों को अपने कंधे पर टिकाए और अपना लंड मेरे गांड में फिर से घुसा दिया.

मैंने ‘धीरे धीरे करो सर..’ बोल रहा था, लेकिन वो जोर जोर से मेरी गांड चोदे जा रहे थे. उनके धक्के से मैं हिला जा रहा था. तभी अचानक उनकी स्पीड बढ़ने लगी.. फिर गरम गरम वीर्य से सर ने मेरी गांड को भर दिया.

मुझे मेरी इस गांड चुदाई की स्टोरी पर आपके कमेंट्स का इन्तजार रहेगा.



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